इंटरनेट की अद्भुत दुनिया: रोचक तथ्य और जानकारियां – Interesting facts about internet.

इंटरनेट की अद्भुत दुनिया: रोचक तथ्य और जानकारियां – Interesting facts about internet.

Interesting facts about internet

इंटरनेट (Interesting facts about internet) आधुनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। हम अपने दैनिक कार्यों से लेकर मनोरंजन तक, लगभग हर क्षेत्र में इंटरनेट पर निर्भर हैं। यह डिजिटल दुनिया हमारे जीवन को सरल बनाती है, लेकिन क्या आप इसके इतिहास और विशेषताओं से परिचित हैं? इस लेख में हम इंटरनेट से जुड़े कुछ ऐसे रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे, जिन्हें जानकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे।

इंटरनेट का जन्म और प्रारंभिक इतिहास

इंटरनेट का जन्म और पहला नाम

इंटरनेट का जन्म 29 अक्तूबर 1969 को हुआ था। हालांकि आज हम इसे ‘इंटरनेट’ के नाम से जानते हैं, लेकिन इसका प्रारंभिक नाम ‘अर्पानेट’ (ARPANET) था, जिसका पूरा नाम Advanced Research Projects Agency Network था। अर्पानेट अमेरिकी रक्षा विभाग की एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी ‘अर्पा’ (ARPA) द्वारा विकसित किया गया था।

अर्पानेट का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोध कंप्यूटरों को एक नेटवर्क में जोड़ना था, ताकि वैज्ञानिक और शोधकर्ता आपस में डेटा और संसाधनों को साझा कर सकें। धीरे-धीरे, अर्पानेट को अन्य नेटवर्कों से जोड़ा गया और यही वर्तमान इंटरनेट का आधार बना। 1983 में इसे औपचारिक रूप से ‘इंटरनेट’ नाम दिया गया।

इंटरनेट का पहला मैसेज और एक मज़ेदार विफलता

इंटरनेट का जन्म दिवस 29 अक्टूबर 1969 को ही UCLA और स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच अर्पानेट पर पहला संदेश भेजने का प्रयास किया गया। इस ऐतिहासिक क्षण में एक मज़ेदार घटना घटी – पहला संदेश पूरा भी नहीं हो पाया था! प्रोफेसर लियोनार्ड क्लेनरॉक ने “LOGIN” शब्द टाइप करना शुरू किया, लेकिन सिस्टम क्रैश हो गया और केवल “LO” ही भेजा जा सका। यह विफलता भी इंटरनेट के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

वर्ल्ड वाइड वेब और पहला वेबपेज

इंटरनेट और वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) में अंतर है। वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट पर चलने वाली एक सेवा है, जिसे सर टिम बर्नर्स-ली ने 1989 में CERN में विकसित किया था। वर्ल्ड वाइड वेब का पहला वेबपेज, जिसे टिम बर्नर्स-ली ने 1991 में बनाया था, आज भी ऑनलाइन है! यह सरल टेक्स्ट वाला पेज info.cern.ch पर मौजूद है और इसमें बताया गया है कि WWW क्या है।

दिलचस्प बात यह है कि मूल पेज तो खो गया था और जो पेज आज देखने को मिलता है, वह 1992 की एक प्रतिलिपि है। यह हमें याद दिलाता है कि डिजिटल युग में भी, हमारा इतिहास कितना नाजुक है।

टिम बर्नर्स-ली ने वर्ल्ड वाइड वेब को पेटेंट नहीं कराया और इसे सबके लिए मुफ्त और खुला रखने का निर्णय लिया। यदि उन्होंने इसे पेटेंट करा लिया होता, तो वे आज विश्व के सबसे धनी व्यक्तियों में शामिल होते, लेकिन संभवतः इंटरनेट इतनी तेजी से विकसित और लोकप्रिय नहीं हो पाता क्योंकि यह आम लोगों की पहुंच से दूर हो जाता।

इंटरनेट का छिपा हुआ विशाल हिस्सा

सरफेस वेब, डीप वेब और डार्क वेब

क्या आप जानते हैं कि जिस इंटरनेट का हम रोज़ाना उपयोग करते हैं – गूगल, यूट्यूब, सोशल मीडिया – वह केवल कुल इंटरनेट का 4% हिस्सा ही है! इसे ‘सरफेस वेब’ कहा जाता है। शेष 96% हिस्सा डीप वेब और डार्क वेब में छिपा हुआ है।

डीप वेब

डीप वेब में वे वेबसाइट्स और पेज शामिल हैं जो सामान्य सर्च इंजन में नहीं दिखाई देते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • बैंक अकाउंट्स और ऑनलाइन बैंकिंग पोर्टल
  • निजी ईमेल और संदेश
  • पासवर्ड-संरक्षित कंटेंट और सदस्यता-आधारित वेबसाइट
  • शैक्षणिक और वैज्ञानिक डेटाबेस
  • कॉर्पोरेट इंट्रानेट
  • सरकारी डेटाबेस

डीप वेब अवैध नहीं है, बल्कि यह हमारी ऑनलाइन गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सिर्फ सार्वजनिक रूप से खोजने योग्य नहीं है।

डार्क वेब

इंटरनेट का सबसे रहस्यमय हिस्सा है डार्क वेब। इस तक पहुंचने के लिए विशेष ब्राउज़र जैसे TOR (The Onion Router) की आवश्यकता होती है। डार्क वेब अवैध गतिविधियों के लिए कुख्यात है, लेकिन इसके कई वैध उपयोग भी हैं:

  • अवैध गतिविधियां: डार्क वेब पर लगभग 50,000 अवैध वेबसाइट मौजूद हैं। यहां अपराधी अपनी पहचान छिपाकर ड्रग्स, हथियार, चोरी किए गए डेटा, हैकिंग सेवाएं और अन्य अवैध सामग्री की बिक्री करते हैं।
  • वैध उपयोग: कुछ पत्रकार, कार्यकर्ता, व्हिसलब्लोअर और जासूस भी अपनी असली पहचान छिपाने और सुरक्षित संचार के लिए डार्क वेब का उपयोग करते हैं, विशेषकर उन देशों में जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित है।

इंटरनेट की विशालता और प्रभाव

एक मिनट में इंटरनेट पर क्या होता है?

इंटरनेट की गति और विशालता अविश्वसनीय है। हर मिनट इंटरनेट पर निम्नलिखित गतिविधियां होती हैं:

  • गूगल पर 5.7 मिलियन सर्च
  • 500 घंटे से अधिक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड
  • 41.6 मिलियन व्हाट्सएप मैसेज भेजे जाते हैं
  • 6,000 से अधिक ट्वीट्स पोस्ट किए जाते हैं
  • 167 मिलियन वीडियो देखे जाते हैं
  • इंस्टाग्राम पर लगभग 65,000 फोटो शेयर की जाती हैं

2020 में एक दिन में जितना डेटा उत्पन्न हुआ, उतना 2000 के दशक की शुरुआत में पूरे एक साल में नहीं बना था। यह सोचकर हैरानी होती है कि आप इस लेख को पढ़ते हुए भी, इंटरनेट पर अरबों डेटा ट्रांसफर हो चुके होंगे!

प्रतिदिन कितने नए डोमेन नाम बनते हैं?

इंटरनेट निरंतर विस्तार कर रहा है। प्रतिदिन लगभग 252,000 नए डोमेन नाम पंजीकृत किए जाते हैं, अर्थात प्रति सेकंड लगभग 3 नई वेबसाइट बन जाती हैं। विश्व में 370 मिलियन से अधिक पंजीकृत डोमेन नाम हैं, जिनमें .com सबसे लोकप्रिय है।

अब तक का सबसे महंगा डोमेन नाम Cars.com है, जिसकी कीमत 872 मिलियन डॉलर थी। अधिकांश प्रीमियम डोमेन नाम पहले ही बिक चुके हैं। एक छोटा और आसानी से याद रखने योग्य .com डोमेन प्राप्त करने के लिए आपको काफी अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ सकती है। यह डिजिटल रियल एस्टेट का नया युग है, जहां एक अच्छे डोमेन एड्रेस की कीमत लाखों डॉलर हो सकती है।

इंटरनेट का बिजली उपभोग

क्या आप जानते हैं कि इंटरनेट पर हमारी हर क्लिक, हर स्ट्रीम, हर डाउनलोड में बिजली खर्च होती है? विश्वभर के डेटा सेंटर वार्षिक रूप से लगभग 200 टेरावाट घंटे बिजली का उपयोग करते हैं, जो संपूर्ण यूनाइटेड किंगडम की वार्षिक बिजली खपत से अधिक है।

यदि इंटरनेट एक देश होता, तो वह बिजली उपभोग के मामले में विश्व का छठा सबसे बड़ा देश होता। कुछ प्रमुख तथ्य:

  • प्रत्येक गूगल खोज में इतनी ऊर्जा लगती है जितनी एक 60 वाट का बल्ब 17 सेकंड में उपयोग करता है
  • क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग जैसी गतिविधियां बहुत अधिक बिजली की खपत करती हैं
  • एक बिटकॉइन लेनदेन में इतनी बिजली खर्च होती है जितनी एक औसत अमेरिकी घर 73 दिनों में उपयोग करता है
  • अनुमान है कि 2030 तक, इंटरनेट विश्व की कुल बिजली उत्पादन का 20% तक उपयोग कर सकता है

इंटरनेट के कुछ मील के पत्थर

ईमेल का जन्म और ‘@’ सिंबल की कहानी

ईमेल इंटरनेट की सबसे लोकप्रिय सेवाओं में से एक है। 1971 में, अमेरिकी कंप्यूटर इंजीनियर रे टॉमलिनसन ने पहला ईमेल प्रोग्राम विकसित किया था, जिन्हें ईमेल के जनक के रूप में जाना जाता है।

पहला ईमेल भेजते समय, उन्हें ईमेल भेजने वाले व्यक्ति के नाम को उसके कंप्यूटर से अलग करने के लिए एक प्रतीक की आवश्यकता थी। उन्होंने अपने कीबोर्ड पर देखा और ‘@’ प्रतीक चुना, क्योंकि यह नामों में कभी प्रयोग नहीं होता था और इसका अर्थ “ऐट” होता है – जैसे “user@computer”।

यह छोटा सा प्रयोग सफल रहा और आज ‘@’ प्रतीक ईमेल पहचान का आधार बन गया है। इस प्रतीक का महत्व इतना अधिक है कि 2010 में इसे न्यूयॉर्क के मॉडर्न आर्ट म्यूज़ियम में प्रदर्शित भी किया गया था!

इंटरनेट का पहला वायरस – द क्रीपर

इंटरनेट का पहला वायरस 1971 में बनाया गया था, जिसका नाम था “द क्रीपर”। इस वायरस ने कंप्यूटर स्क्रीन पर एक साधारण संदेश दिखाया – “आई’म द क्रीपर, कैच मी इफ यू कैन!” (मैं क्रीपर हूँ, पकड़ सकते हो तो पकड़ लो!)।

इस वायरस को बॉब थॉमस ने एक प्रयोग के रूप में बनाया था। उन्हें यह जांचना था कि कोई प्रोग्राम नेटवर्क पर स्वयं को कैसे प्रतिलिपित कर सकता है। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि उनका यह छोटा सा प्रयोग आज के साइबर अपराध का आधार बनेगा।

इंटरनेट पर पहली तस्वीर

इंटरनेट पर साझा की गई पहली तस्वीर कोई गंभीर उपलब्धि नहीं, बल्कि एक मज़ेदार घटना थी। 1992 में CERN में, जहां वर्ल्ड वाइड वेब विकसित किया गया था, कुछ कर्मचारियों ने “Les Horribles Cernettes” नामक एक पैरोडी पॉप बैंड की तस्वीर अपलोड की थी।

यह बैंड CERN के कर्मचारियों से ही बना था और भौतिकी पर आधारित पैरोडी गाने गाता था। टिम बर्नर्स-ली के सहकर्मी सिल्वानो डी जेनारो ने यह तस्वीर ली थी। बर्नर्स-ली ने इसे फोटोशॉप के प्रारंभिक संस्करण में संपादित करके GIF प्रारूप में सहेजा और फिर वेब पर अपलोड किया। यह छोटी सी घटना इंटरनेट पर छवियों के विशाल युग की शुरुआत थी।

इंटरनेट का पहला ऑनलाइन अपराध

इंटरनेट का पहला प्रमुख साइबर अपराध 1994 में सिटीबैंक के विरुद्ध किया गया था। रूसी हैकर व्लादिमीर लेविन ने बैंक के कंप्यूटर सिस्टम में घुसपैठ करके 10 मिलियन डॉलर से अधिक की चोरी की।

यद्यपि बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन चुराए गए धन का अधिकांश भाग कभी वापस नहीं मिला। इस घटना ने बैंकिंग जगत में हलचल मचा दी और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा के नए युग की शुरुआत हुई।

दिलचस्प बात यह है कि लेविन पकड़े नहीं जाते यदि वे हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरते समय अपना असली नाम प्रयोग न करते!

इंटरनेट के कुछ अन्य रोचक तथ्य

इंटरनेट पर कुछ भी वास्तव में “हटाया” नहीं जाता

जब आप कोई फोटो या पोस्ट डिलीट करते हैं, तो क्या वह वास्तव में अस्तित्व से मिट जाती है? उत्तर है – शायद नहीं! “इंटरनेट आर्काइव” जैसी सेवाएं 1996 से वेबसाइटों का स्नैपशॉट संग्रहित कर रही हैं।

इसकी “वेबैक मशीन” के माध्यम से आप 630 बिलियन से अधिक वेब पेजों तक पहुंच सकते हैं जो अब मौजूद नहीं हैं। अमेज़न पर आपकी पहली खरीदारी से लेकर आपके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट तक, सब कुछ कहीं न कहीं इंटरनेट पर संरक्षित है।

फेसबुक पर हटाए गए फोटो वास्तव में वर्षों तक उनके सर्वर पर रह सकते हैं। यह सोचकर आप आश्चर्यचकित हो सकते हैं कि आपके द्वारा हटाया गया कोई भी डेटा वर्षों तक आर्काइव के रूप में इंटरनेट पर मौजूद रह सकता है।

आपके डेटा का सच

क्या आपने कभी सोचा है कि इंटरनेट पर कंपनियां आपके बारे में कितना कुछ जानती हैं? एक औसत इंटरनेट उपयोगकर्ता के बारे में 1,500 से अधिक डेटा बिंदु एकत्रित किए जाते हैं!

यह केवल आपका नाम या ईमेल ही नहीं, बल्कि आपकी ब्राउज़िंग आदतें, खरीदारी पैटर्न, स्थान डेटा, यहां तक कि आपके कीबोर्ड स्ट्रोक्स तक को ट्रैक किया जाता है।

2018 के फेसबुक-कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल में 87 मिलियन उपयोगकर्ताओं का डेटा उनकी अनुमति के बिना एकत्रित किया गया और विज्ञापन के लिए उपयोग किया गया। इंटरनेट पर कोई भी चीज वास्तव में “मुफ्त” नहीं है। यदि आप सीधे पैसे नहीं दे रहे हैं, तो आप स्वयं एक उत्पाद हैं, आपका डेटा एक उत्पाद है।

इंटरनेट एक्सप्लोरर की कहानी

आज भले ही गूगल क्रोम सबसे अधिक लोकप्रिय ब्राउजर हो, लेकिन एक समय ऐसा था जब इंटरनेट एक्सप्लोरर इंटरनेट का सबसे लोकप्रिय ब्राउजर था। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित, 1990 के दशक में इंटरनेट एक्सप्लोरर का बाजार हिस्सा 95% से अधिक था।

2022 में माइक्रोसॉफ्ट ने इंटरनेट एक्सप्लोरर को पूरी तरह से बंद कर दिया। ब्राउजर की दुनिया में अपने एकाधिकार के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने इंटरनेट एक्सप्लोरर के विकास पर ध्यान देना कम कर दिया। जब मोज़िला फायरफॉक्स और गूगल क्रोम जैसे ब्राउजर तेजी से विकसित हो रहे थे, तब इंटरनेट एक्सप्लोरर उनका मुकाबला नहीं कर पाया।

इसके कोड में इतनी समस्याएं थीं कि माइक्रोसॉफ्ट के लिए एक नया ब्राउज़र बनाना इंटरनेट एक्सप्लोरर को सुधारने से आसान था। इसीलिए बाद में माइक्रोसॉफ्ट ने ‘एज’ नाम से अपना नया ब्राउजर विकसित किया।

उपसंहार

इंटरनेट हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है, लेकिन शायद ही कभी हम इसके इतिहास, विशालता और प्रभाव के बारे में गहराई से सोचते हैं। यह अद्भुत तकनीक निरंतर विकसित हो रही है और हमारे जीवन को प्रतिदिन बदल रही है।

इस लेख में हमने इंटरनेट के जन्म से लेकर उसके वर्तमान स्वरूप तक की यात्रा पर एक नज़र डाली। हमने जाना कि कैसे एक छोटे से नेटवर्क से शुरू होकर यह आज की विशाल डिजिटल दुनिया में विकसित हुआ है। हमने इंटरनेट से जुड़े कई रोचक तथ्यों के बारे में भी जाना, जैसे कि डीप वेब और डार्क वेब का रहस्यमय संसार, प्रति मिनट होने वाली ऑनलाइन गतिविधियां, पहला वायरस और पहला साइबर अपराध।

अगली बार जब आप इंटरनेट का उपयोग करें, तो इन बातों को याद रखें और इस अद्भुत तकनीक के प्रति और अधिक जागरूक रहें।

अपनी डिजिटल यात्रा को सुरक्षित और ज्ञानवर्धक बनाएं!


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